Aerial view of tree canopies in coniferous forest at sunset. (photo: Daniel Garrido / Getty Images)
Cover “सस्टेनेबिलिटी” अब दुनिया के नए और नाजुक संदर्भ में कॉर्पोरेट व्यापार रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है. (चित्र: हिरोशी वतनबे / गेटी इमेजेज)
Aerial view of tree canopies in coniferous forest at sunset. (photo: Daniel Garrido / Getty Images)

वर्ष 2026 में ‘सस्टेनेबिलिटी’ केवल नैतिकता या कॉर्पोरेट छवि का विषय नहीं रह जाएगी, बल्कि यह रणनीतिक योजना का मूलभूत आधार बन चुकी है. एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) की नवीनतम रिपोर्ट प्रमुख प्रवृत्तियों, जोखिमों, अवसरों और एक नाजुक भू-राजनीति के तहत बदलती दुनिया के नए संदर्भों को प्रदर्शित करती है.

वित्तीय डेटा, क्रेडिट रेटिंग्स और शेयर बाजार सूचकांक (जैसे S&P 500) प्रदान करने वाली अग्रणी वैश्विक संस्था एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) ने “S&P Global’s Top 10 Sustainability Trends to Watch in 2026” रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट सस्टेनेबिलिटी, जलवायु और ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों व विचारकों के विचारों पर आधारित है. इसमें उन 10 प्रमुख रुझानों का निष्कर्ष है, जिन पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है. इस बढ़ती वास्तविकता के बीच कि पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य तक ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करना अब संभव नहीं लग रहा है, 2026 में सस्टेनेबिलिटी पर चर्चा केवल कल्पना से अधिक यथार्थवादी हो गई है. रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अब “अनुकूलन” और “लचीलापन” में निवेश करना अनिवार्य है, ताकि हम उस दुनिया के लिए तैयार हो सकें जहां तापमान का बढ़ना अब अपरिहार्य है.

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Thermometer showing tropical heat and sky with hot sun rays in Celsius and Fahrenheit (photo: SimpleImages / Getty Images)
Above पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य के अनुसार दुनिया अब तापमान वृद्धि को सीमित करने में विफल हो सकती है. (चित्र: सिंपलइमेजेज / गेटी इमेजेज)
Thermometer showing tropical heat and sky with hot sun rays in Celsius and Fahrenheit (photo: SimpleImages / Getty Images)

1. दुनिया बहु-केंद्रित सस्टेनेबिलिटी की ओर बढ़ रही है

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Top view green forest with globe earth. Sustainable Environment concept. Carbon reduction emissions target. Green energy is eco-friendly. Save Earth or World Earth Day Concept. Environmental Care (photo: Khanchit Khirisutchalual / Getty Images)
Above प्रमुख शक्तियों की नीतियों में अंतर के कारण, सस्टेनेबिलिटी का प्रबंधन अब वैश्विक मानकों के बजाय क्षेत्रीय संदर्भों के अनुकूल होने का विषय बन जाएगा. (चित्र: खांचित खिरिसुत्चलूअल / गेटी इमेजेज)
Top view green forest with globe earth. Sustainable Environment concept. Carbon reduction emissions target. Green energy is eco-friendly. Save Earth or World Earth Day Concept. Environmental Care (photo: Khanchit Khirisutchalual / Getty Images)

बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ऊर्जा और जलवायु से जुड़ी भिन्नताओं के कारण, दुनिया अब तेजी से सस्टेनेबिलिटी के लिए अलग-अलग क्षेत्रीय दृष्टिकोणों की ओर बढ़ रही है. यही भिन्नताएं नए वैश्विक परिदृश्य की मुख्य कथा तय कर रही हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसी आर्थिक महाशक्तियों के ऊर्जा और जलवायु नीतियों में स्पष्ट अंतर हैं. इसके परिणामस्वरूप, उभरते बाजारों और विकासशील देशों को धन जुटाने और आपदाओं से निपटने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए सस्टेनेबिलिटी का प्रबंधन केवल एक वैश्विक मानक लागू करने के बजाय, हर क्षेत्र की अपनी विशिष्टताओं के अनुसार ढलने पर केंद्रित होगा.

2. जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) में निवेश

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Fire fighting helicopter carry water bucket to extinguish the forest fire. (photo: Toa55 / Getty Images)
Above म्यूनिख रे (Munich Re) के अनुसार, यदि दुनिया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में गति नहीं लाती है, तो 2030 तक प्राकृतिक आपदाएं 2015 की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक हो सकती हैं. (चित्र: Toa55 / गेटी इमेजेज)
Fire fighting helicopter carry water bucket to extinguish the forest fire. (photo: Toa55 / Getty Images)

जलवायु परिवर्तन की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि वह अपरिहार्य जलवायु प्रभावों से निपटने के लिए अनुकूलन और लचीलेपन में अपना निवेश बढ़ाए. यह स्वीकार्यता बढ़ रही है कि पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग सीमा लक्ष्य को हम पार कर सकते हैं.

दुनिया की अग्रणी पुनर्बीमा (Reinsurance) कंपनियों में से एक म्यूनिख रे (Munich Re) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में वैश्विक प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान 320 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी अधिक है. संयुक्त राष्ट्र का डेटा भी यह दर्शाता है कि यदि उत्सर्जन कम नहीं हुआ, तो 2030 तक आपदाएं 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं. अतः लचीलेपन और सस्टेनेबिलिटी में निवेश केवल नुकसान कम करने के लिए नहीं, बल्कि उन भारी लागतों से बचने के लिए भी है जो दुनिया को भविष्य में चुकानी पड़ सकती हैं.

3. सुरक्षा और स्वच्छता के बीच संतुलन

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Interior view of a futuristic data center designed for artificial intelligence processing, featuring glowing servers and digital data streams. (photo: imaginima / Getty Images)
Above डेटा सेंटर्स की बिजली खपत 2030 तक 2,200 टेरावाट-घंटे से अधिक हो सकती है. (चित्र: इमेजिनिमा / गेटी इमेजेज)
Interior view of a futuristic data center designed for artificial intelligence processing, featuring glowing servers and digital data streams. (photo: imaginima / Getty Images)

ऊर्जा का विस्तार और सस्टेनेबिलिटी अब एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ चुके हैं. यह स्थिति विश्व के ऊर्जा भविष्य को पहले से कहीं अधिक जटिल बना रही है.

जीवाश्म ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) एक साथ बढ़ रहे हैं. वहीं, एआई (AI) का तेजी से विकास वर्तमान ऊर्जा कहानी का मुख्य संचालक बन गया है. एआई की भारी बिजली मांग 2026 से पहले सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. अनुमान है कि डेटा सेंटर की बिजली खपत 2030 तक 2,200 टेरावाट-घंटे को पार कर जाएगी.

वर्ष 2026 में, हम वैश्विक सौर ऊर्जा प्रतिष्ठानों में पहली बार साल-दर-साल गिरावट देख सकते हैं, जिसका मुख्य कारण चीन में आई मंदी है. हालांकि इलेक्ट्रिक वाहन सड़क परिवहन क्षेत्र में कार्बन कम करने का मुख्य साधन बने रहेंगे. इसके साथ ही, वैश्विक व्यापार और जलवायु नीतियां ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन रिपोर्टिंग को मानकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. यूरोपीय संघ का सीबीएएम (CBAM) जब पूरी तरह लागू होगा, तो यह कार्बन उत्सर्जन के आधार पर आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ा देगा.

4. एआई (AI) और डेटा सेंटर: सस्टेनेबिलिटी की दोधारी तलवार

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AI Processor. Artificial Intelligence Chip Inside Architecture Concept (photo: BlackJack3D / Getty Images)
Above संगठनों को उत्पादन बढ़ाने के लिए एआई के उपयोग और अपने स्वयं के कार्बन फुटप्रिंट को नियंत्रित करने के बीच एक कठिन संतुलन बनाना होगा. (चित्र: BlackJack3D / गेटी इमेजेज)
AI Processor. Artificial Intelligence Chip Inside Architecture Concept (photo: BlackJack3D / Getty Images)

एआई एक ऐसी तकनीक है जो दुनिया को बदल देगी, लेकिन 2026 में इसके नकारात्मक प्रभावों की भी कड़ी जांच होगी. जनरेटिव एआई का समर्थन करने वाले डेटा सेंटर्स के विस्तार में भारी मात्रा में ऊर्जा और शीतलन के लिए पानी की खपत होती है. संगठनों को यह कठिन चुनौती मिलेगी कि वे उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का इस्तेमाल तो करें, लेकिन साथ ही अपने कार्बन फुटप्रिंट को भी सीमित रखें.

हालांकि, हम “ग्रीन एआई” मानकों का उदय देखेंगे, जिसका उद्देश्य ऐसे मॉडल विकसित करना होगा जो कम संसाधनों का उपयोग करते हैं. बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों पर ऐसे क्षेत्रों में डेटा सेंटर बनाने का दबाव होगा जहां की जलवायु ठंडी हो या जहां नवीकरणीय ऊर्जा आसानी से उपलब्ध हो.

दूसरी ओर, जलवायु जोखिमों की सटीक गणना और पूर्वानुमान में एआई एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित होगा. 2026 में असली चुनौती यह होगी कि “एल्गोरिदम के लाभ” और “संसाधनों की लागत” के बीच संतुलन कैसे बिठाया जाए, ताकि सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित हो सके.

5. जल और खाद्य प्रणाली संकट: जोखिम मूल्यांकन का नया केंद्र

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Precious water in your hand, clear, transparent and clean source of life, World Water Day background (photo: artplus / Getty Images)
Above वर्ष 2026 में, वैश्विक कंपनियों को अपनी पूरी आपूर्ति श्रृंखला में पानी के उपयोग की रिपोर्ट देना अनिवार्य हो जाएगा. (चित्र: आर्टप्लस / गेटी इमेजेज)
Precious water in your hand, clear, transparent and clean source of life, World Water Day background (photo: artplus / Getty Images)

कुछ उद्योगों में पानी का मुद्दा कार्बन से भी ज्यादा अहम हो जाएगा. जलवायु परिवर्तन के कारण पानी की कमी और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे जल-गहन उद्योगों का विकास सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करेगा. ऐसे में जल संसाधनों का चक्रीय प्रबंधन प्रतिस्पर्धात्मकता का मुख्य सूचक बन जाएगा.

2026 में, कई क्षेत्रों में पानी की कीमतें वास्तविकता को दर्शाने लगेंगी, जिससे खाद्य और पेय उद्योग की उत्पादन लागत प्रभावित होगी. वैश्विक कंपनियों को यह साबित करना होगा कि वे स्थानीय समुदायों के पानी के हिस्से में हस्तक्षेप नहीं कर रही हैं.

यह संकट सिंचाई पर निर्भर कृषि प्रणालियों से भी जुड़ा है. बारिश के बदलते पैटर्न से पारंपरिक खेती प्रभावित हो रही है, जिससे प्रिसिजन एग्रीकल्चर (precision agriculture) में निवेश बढ़ रहा है. दुनिया भर में सस्टेनेबिलिटी बनाए रखने के लिए यह बदलाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

6. सप्लाई चेन की अनदेखी कमजोरियां

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Man's hand holding a piece of copper to examine it for industrial use (photo: Oat_Phawat / Getty Images)
Above डेटा सेंटर और एआई के युग में कॉपर जैसी आपूर्ति श्रृंखलाएं व्यापार कूटनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएंगी. (चित्र: ओट_फावत / गेटी इमेजेज)
Man's hand holding a piece of copper to examine it for industrial use (photo: Oat_Phawat / Getty Images)

वर्ष 2026 में, व्यापारिक तनाव और नीतियों में कमी के कारण जलवायु और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े सप्लाई चेन जोखिमों पर ध्यान कम हो सकता है. यूरोपीय संघ, जिसने कभी आपूर्ति श्रृंखला के लिए कड़े मानक तय किए थे, अब कुछ नीतियों में ढील दे रहा है. लेकिन सीबीएएम (CBAM) जैसी नीतियां लागू हैं, जो कार्बन के आधार पर एल्यूमीनियम, सीमेंट और स्टील जैसी वस्तुओं पर शुल्क लगाती हैं. एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार, इससे कार्बन सघन देशों से आयात लागत 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकती है.

टेक सेक्टर और ऊर्जा संक्रमण के केंद्र में मौजूद सप्लाई चेन 2026 की भू-राजनीति में अहम भूमिका निभाएंगे. कॉपर, लिथियम और दुर्लभ खनिज जैसे महत्वपूर्ण संसाधन एआई और क्लीन एनर्जी के विकास के लिए मूलभूत आवश्यकताएं हैं. इन संसाधनों तक पहुंच वैश्विक निवेश के नए रुझानों को तय करेगी.

7. जैव विविधता (Biodiversity) का नुकसान: विकास के लिए नई बाधा

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Moisture in the newly exposed soil rises as steam from a recent clearcut on the Olympic Peninsula, Washington. (photo: Ethan Welty / Getty Images)
Above वर्ष 2026 में, वनों की कटाई से जुड़े कड़े नियम (जैसे EUDR) लागू होंगे, जिससे व्यवसायों को अपनी सस्टेनेबिलिटी साबित करनी होगी. (चित्र: ईथन वेल्टी / गेटी इमेजेज)
Moisture in the newly exposed soil rises as steam from a recent clearcut on the Olympic Peninsula, Washington. (photo: Ethan Welty / Getty Images)

प्रकृति हमारी वह प्राकृतिक पूंजी है जो तेजी से घट रही है. 2026 में वनों की कटाई को कम करने वाले नियम पूरी तरह से लागू होंगे. व्यवसायों को सैटेलाइट इमेजिंग के माध्यम से यह साबित करना होगा कि उनके उत्पाद वनों की कटाई से नहीं जुड़े हैं. कॉर्पोरेट मूल्यांकन में अब “प्रकृति पर निर्भरता के जोखिम” को भी शामिल किया जाएगा.

हम “जैव विविधता क्रेडिट” के विकास को देखेंगे, जो कार्बन क्रेडिट के समान लेकिन अधिक जटिल है. संगठन केवल सीएसआर (CSR) के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधनों को स्थिर रखने हेतु अपने आस-पास के पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करने में निवेश करेंगे.

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8. सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर की अनिश्चितता का युग

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Cityscape mixed with green plants, multi layered image (photo: Hiroshi Watanabe / Getty Images)
Above वर्ष 2026 में “ग्रीनवाशिंग” (greenwashing) या पर्यावरण के अनुकूल होने की झूठी छवि बनाना व्यवसायों के लिए काफी कठिन हो जाएगा. (चित्र: हिरोशी वतनबे / गेटी इमेजेज)
Cityscape mixed with green plants, multi layered image (photo: Hiroshi Watanabe / Getty Images)

आर्थिक मंदी के कारण कुछ क्षेत्रों में नियमों में ढील के बावजूद, 2026 में आईएसएसबी (ISSB) जैसे अंतरराष्ट्रीय सस्टेनेबिलिटी मानक कई देशों में अनिवार्य हो जाएंगे. सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग अब केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण “रणनीतिक डेटा” बन जाएगी.

इस वर्ष “ग्रीनवाशिंग” करना बहुत मुश्किल हो जाएगा. नियामक संस्थाएं डेटा की सटीकता की कड़ाई से जांच करेंगी. बिना ठोस निवेश योजना के यह दावा करना कि “हम नेट जीरो होंगे” कानूनी जोखिम को बढ़ा सकता है.

डिजिटल तकनीक की मदद से सस्टेनेबिलिटी डेटा को सटीक रूप से संकलित करने वाली कंपनियों को कम लागत वाले फंड तक पहुंचने में फायदा होगा. सस्टेनेबिलिटी अब आधुनिक व्यवसाय प्रबंधन का एक नया मानदंड बन चुकी है.

9. पूंजी के लिए प्रतिस्पर्धा

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Green Logistics concept. businessman holding a green world with Clean energy transportation icons.Sustainable logistics. Environmentally friendly transportation of goods.Economic trade, import, export (photo: pcess609 / Getty Images)
Above जलवायु अनुकूलन से जुड़े महत्वपूर्ण सस्टेनेबिलिटी कार्यों के लिए पूंजी की मांग अब 12 से 14 गुना अधिक बढ़ गई है. (चित्र: pcess609 / गेटी इमेजेज)
Green Logistics concept. businessman holding a green world with Clean energy transportation icons.Sustainable logistics. Environmentally friendly transportation of goods.Economic trade, import, export (photo: pcess609 / Getty Images)

जलवायु अनुकूलन के लिए पूंजी की मांग 12-14 गुना बढ़ गई है. 2026 में ग्रीन बॉन्ड बाजार मुख्य रूप से “ट्रांजिशन फाइनेंस” पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि उच्च उत्सर्जन वाले उद्योगों (जैसे सीमेंट या स्टील) को नई तकनीक में अपग्रेड करने में मदद मिल सके.

निवेशक केवल यह नहीं देखेंगे कि परियोजनाएं पहले से “हरी” हैं या नहीं, बल्कि वे उन कंपनियों की तलाश करेंगे जो स्वयं को सस्टेनेबिलिटी की दिशा में बदल रही हैं. सस्टेनेबिलिटी के माध्यम से धन जुटाना केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि छोटे व मध्यम उद्यमों (SMEs) तक भी फैलेगा.

व्यापार जगत को निवेशकों को यह विश्वास दिलाना होगा कि सस्टेनेबिलिटी कोई वित्तीय बोझ नहीं है, बल्कि बदलती दुनिया में निरंतर नकदी प्रवाह उत्पन्न करने की गारंटी है.

10. बुजुर्ग आबादी और श्रमिक: अर्थव्यवस्था को हिलाने वाली मौन चुनौती

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Boat Building Craftsmen (photo: Kelvin Murray / Getty Images)
Above सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, कंपनियों को मानव संसाधन रणनीतियों में बदलाव करना होगा और समानता को बढ़ावा देना होगा. (चित्र: केल्विन मरे / गेटी इमेजेज)
Boat Building Craftsmen (photo: Kelvin Murray / Getty Images)

जबकि ज्यादातर लोग पर्यावरण (E) पर ध्यान केंद्रित करते हैं, सामाजिक (S) कारक जैसे कि बढ़ती बुजुर्ग आबादी 2026 के श्रम बाजार पर गंभीर प्रभाव डालेगी. क्लीन टेक उद्योगों में उच्च-कुशल श्रमिकों की कमी सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा बन सकती है.

एआई उत्पादकता में कुछ हद तक मदद कर सकता है, लेकिन यह मानवीय सेवाओं की आवश्यकता को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सकता. कंपनियों को अपनी मानव संसाधन रणनीतियों को सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों का हिस्सा बनाना होगा, जैसे विविधता और समानता (DEI) को बढ़ावा देना, ताकि युवा प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सके.

स्थिरता कोई वित्तीय बोझ नहीं है, बल्कि यह एक गारंटी है कि व्यवसाय बदलती दुनिया में लगातार नकदी प्रवाह उत्पन्न कर सकते हैं। - एसएंडपी ग्लोबल

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