Cover बायोनेट के अध्यक्ष त्साई चेंग-ह्सिएन पुनर्योजी चिकित्सा के अपने 20 वर्षों के अनुभव को व्यापक एशियाई मंच पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं (फोटो: पॉल चेन).

साल 1999 में, त्साई चेंग-ह्सिएन ने बायोनेट की स्थापना की थी. यह वह समय था जब मानव जीनोम डिकोडिंग परियोजना अपने अंतिम चरण में थी और इसके प्रारंभिक परिणाम सामने आने वाले थे.

पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) को बढ़ावा देने के प्रति समर्पित बायोनेट (Bionet) के अध्यक्ष त्साई चेंग-ह्सिएन, अपने 20 से अधिक वर्षों के अनुभव को व्यापक एशियाई मंच पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं. साल 1999 में जब उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया था, तब उन्होंने जीनोमिक और पुनर्योजी चिकित्सा पर विश्वास जताया था. आज वे सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) के साथ स्वास्थ्य प्रबंधन को नया अर्थ दे रहे हैं. उनका मानना है कि विज्ञान की मदद से दीर्घायु प्राप्त की जा सकती है और यह एक ऐसा विकल्प है जिसका अधिकार हर किसी को है. यह युगांतरकारी क्रांति अब शुरू होने ही वाली है.

साल 1999 में, त्साई चेंग-ह्सिएन ने बायोनेट की स्थापना की. उस समय मानव जीनोम डिकोडिंग परियोजना अपने अंतिम चरण में थी और शुरुआती परिणाम आने वाले थे. कई लोगों के लिए यह एक दूर का और अप्राप्य भविष्य था, लेकिन उन्होंने पहले ही देख लिया था कि भविष्य की दुनिया कैसी होगी. “मानव जीनोम डिकोडिंग का वास्तविक अर्थ क्या है? भविष्य में, मानव शरीर को केवल एक मशीन या जैविक इकाई के बजाय एक बड़े डेटा या सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम के रूप में देखा जा सकेगा.” डिकोडिंग के बाद, जब हम इस ‘सॉफ़्टवेयर’ को खोलकर देखेंगे, तो पाएंगे कि हर इंसान एक-दूसरे से काफी अलग है. इसी से अगली चर्चा शुरू हुई: “जब हम इतने अलग हैं, तो हम एक ही तरह की दवा कैसे ले सकते हैं? त्वचा की देखभाल का तरीका एक जैसा कैसे हो सकता है? या हमारी स्वास्थ्य जांच एक जैसी कैसे हो सकती है?” इन सवालों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि सटीक चिकित्सा का युग जल्द ही आएगा.

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Above अपने जीन्स को समझने से न केवल जीवनशैली में सुधार होता है, बल्कि बीमारियों को पहले ही रोका जा सकता है (फोटो: पॉल चेन).

इसके साथ ही, पुनर्योजी चिकित्सा की प्रगति ने मानव शरीर को लंबा जीवन काल (Life Span) प्रदान किया है. “किसी एक अंग के बूढ़े या खराब होने के कारण पूरे शरीर को बेकार नहीं समझना चाहिए. हम एक-एक करके अंगों की मरम्मत कर सकते हैं और उन्हें बदल सकते हैं.” ये दो मान्यताएं दीर्घायु (Longevity) को समझने के लिए उनका प्रारंभिक बिंदु बन गईं. त्साई चेंग-ह्सिएन एक सच्ची कहानी साझा करते हैं, जहां एक मधुमेह रोगी के पैर में खरोंच आ गई थी, जिसके कारण अंततः उसका पैर काटना पड़ा. इसके बाद वह कभी सामान्य रूप से चल नहीं पाया और उसका स्वास्थ्य लगातार गिरता गया. “हम उस एक सेंटीमीटर के घाव को पुनर्योजी चिकित्सा से ठीक कर सकते थे, ताकि अंग काटने की नौबत न आए. यह पुनर्योजी चिकित्सा का एक ऐसा उदाहरण है, जो हमारे आस-पास ही घटित होता है.” जीवनकाल बढ़ाने का महत्व अक्सर हमारे रोज़मर्रा के जीवन में छिपा होता है.

बायोनेट के अनुसार, दीर्घायु प्राप्त करने के लिए स्वयं को समझना आवश्यक है

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Above सटीक चिकित्सा का मूल उद्देश्य लोगों को उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य रणनीति प्रदान करना है, ताकि उनके द्वारा स्वास्थ्य पर लगाया गया समय और पैसा अधिकतम लाभ दे सके! (फोटो: पॉल चेन)

साल 2009 में, त्साई चेंग-ह्सिएन ने अपना जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing) पूरा किया था, जिसकी लागत उस समय लगभग 30,000 अमेरिकी डॉलर थी. उस परीक्षण ने उन्हें अपने शरीर को एक नए सिरे से समझने में मदद की. “आपका स्वास्थ्य प्रबंधन, आपको कौन-सी जांच करानी चाहिए, अपनी त्वचा की देखभाल कैसे करनी चाहिए, आपका खान-पान और फिटनेस — यह सब दूसरों से बिल्कुल अलग होता है.” उन्होंने फिटनेस का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनके शरीर में विस्फोटक शक्ति (Explosive Power) अधिक है, लेकिन सहनशक्ति (Endurance) कम है. “पहले मैंने एक फिटनेस ट्रेनर रखा था, जिसने मेरे लिए एक घंटे का वर्कआउट प्लान तैयार किया, लेकिन मैं बीच में ही थक जाता था.” बाद में उन्हें समझ आया कि यह इच्छाशक्ति की कमी नहीं थी, बल्कि उनके जीन्स का प्रभाव था. “मुझसे 20 मिनट से अधिक व्यायाम नहीं कराया जा सकता, लेकिन मेरा 20 मिनट का वर्कआउट दूसरों के लंबे समय तक किए गए व्यायाम के बराबर होता है.”

यह जानने के बाद, उन्होंने खुद को दूसरों के मानकों पर तौलना बंद कर दिया, और उनका व्यायाम अधिक निरंतर व प्रभावी हो गया. जीन्स को समझने से न केवल जीवनशैली में सुधार होता है, बल्कि बीमारियों को भी पहले ही रोका जा सकता है. उन्होंने बताया कि कुछ विशिष्ट जीन वाले लोगों में शराब पचाने की गति बहुत धीमी होती है, “जिससे उनमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर का खतरा दूसरों की तुलना में 20 से 30 गुना अधिक होता है. यदि आपको यह पहले ही पता हो, तो आप रोकथाम के उपाय कर सकते हैं, जिससे पूरी स्थिति बदल जाती है.” सटीक चिकित्सा का मूल उद्देश्य लोगों को एक व्यक्तिगत रणनीति देना है, ताकि स्वास्थ्य पर निवेश किया गया हर पल और हर पैसा अधिकतम लाभ दे सके! “कम मेहनत में अधिक लाभ, बेहतर परिणाम, और समय व धन का सबसे इष्टतम उपयोग.”

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Above लंबा जीवन जीना केवल पहला कदम है, लेकिन असल लक्ष्य बेहतर जीवन जीना है (फोटो: पॉल चेन).

उन्होंने “रोकथाम को प्राथमिकता” देने के तर्क पर भी ज़ोर दिया. एक अनुमान के अनुसार, शुरुआती हस्तक्षेप और बीमारी के बाद के इलाज के खर्च में बहुत बड़ा अंतर होता है. “क्या हमें अपने संसाधन बीमारी के बाद के इलाज और राहत पर खर्च करने चाहिए, या शुरुआत में ही रोकथाम और देखभाल पर?” यह सवाल केवल व्यक्तिगत स्तर का नहीं है, बल्कि पूरे समाज के चिकित्सा संसाधनों के आवंटन पर एक चर्चा है. उनका मानना है कि सटीक चिकित्सा एक ऐसा उपकरण है, जो रोकथाम को व्यावहारिक और मापने योग्य बनाता है. हर व्यक्ति लंबी अवधि तक अपने स्वास्थ्य संबंधी डेटा को ट्रैक कर सकता है और अपना स्वयं का आधार रेखा (Baseline) स्थापित कर सकता है. “आपका कोलेस्ट्रॉल 100, मेरा 80 और किसी और का 120 — इन सभी के अलग-अलग मायने हो सकते हैं.”

पुनर्योजी और सटीक चिकित्सा भविष्य में दीर्घायु की कुंजी है

भविष्य के दीर्घायु उद्योग पर अपने विचार व्यक्त करते हुए त्साई चेंग-ह्सिएन स्वीकार करते हैं कि पिछले 100 वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के कारण मानव की औसत आयु में लगातार वृद्धि हुई है. वहीं, अगली एक सदी में जीवनकाल बढ़ाने की मुख्य शक्ति “पुनर्योजी चिकित्सा” और “सटीक चिकित्सा” का संयोजन होगी. “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल जीवनकाल (Life Span) ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य काल (Health Span) भी काफी बढ़ गया है.” हालांकि, लंबा जीवन जीना केवल पहला कदम है; असल लक्ष्य स्वस्थ जीवन जीना है. उन्होंने पालतू जानवरों की चिकित्सा का उदाहरण देते हुए कहा, “आधुनिक चिकित्सा की बदौलत कुत्ते और बिल्लियां, जो पहले 7 से 10 साल तक जीवित रहते थे, अब 15 साल तक जीने लगे हैं. लेकिन 15 साल के बाद के 5 साल अक्सर बीमारी और अस्पताल के चक्कर लगाने में बीतते हैं, जो मानसिक रूप से बहुत तनावपूर्ण होता है.” यह स्थिति इंसानों पर भी लागू होती है. “हमारी पीढ़ी देख सकेगी कि कैसे जीवन चक्र और स्वास्थ्य चक्र दोनों पहले से कहीं अधिक लंबे हो रहे हैं, जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया.”

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Above वास्तविक बदलाव लाने के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं हर किसी के लिए सुलभ हो सकें (फोटो: पॉल चेन).

वास्तविक बदलाव तभी हो सकता है जब तकनीक के ज़रिए इसे हर किसी के लिए वहनीय (Affordable) बनाया जाए. ठीक उसी तरह जैसे एसर (Acer), क्वांटा (Quanta) और टीएसएमसी (TSMC) जैसी कंपनियों ने अपनी तकनीकी प्रगति के ज़रिए हाई-टेक उत्पादों को आम उपभोक्ता तक पहुँचाया. त्साई चेंग-ह्सिएन इस प्रक्रिया को ‘प्रौद्योगिकी अपस्फीति’ (Technology Deflation) कहते हैं, “यह लागत कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि उन्नत अनुसंधान और विकास के माध्यम से गुणवत्ता बढ़ाने और कीमतों को घटाने के बारे में है.”

उनका मानना है कि जीवन विज्ञान भी इसी चरण से गुज़र रहा है. केवल जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) की लागत इसका सबसे बड़ा प्रमाण है. साल 2009 में एक संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण में लगभग 30,000 अमेरिकी डॉलर लगते थे, जबकि आज इसी प्रक्रिया में केवल 100 से 200 डॉलर का खर्च आता है. बायोनेट का लक्ष्य इन लागतों को इतना कम करना है कि इसे हर कोई आसानी से वहन कर सके. “एक आईफ़ोन कम खरीदें और आप अपने जीनोम का अनुक्रमण करा सकते हैं, जिससे आपको अपने सभी 3.3 बिलियन बेस पेयर की जानकारी मिल जाएगी.” एक्सोसोम (Exosomes) जैसी उभरती हुई पुनर्योजी चिकित्सा तकनीकें भी इसी राह पर हैं. वे दुर्लभ और महंगी नैदानिक प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर बढ़ रही हैं और आम लोगों के जीवन का हिस्सा बन रही हैं.

साक्षात्कार के अंत में, जब उनसे पूछा गया कि “लंबा जीवन जीना” या “बेहतर जीवन जीना” — दोनों में से क्या अधिक महत्वपूर्ण है? तो उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया: “दोनों आवश्यक हैं, और दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं. जीवन की गुणवत्ता भीतर और बाहर, दोनों जगह समान रूप से महत्वपूर्ण है.” भविष्य की दीर्घायु एक ऐसी यात्रा है, जिस पर हर कोई चल सकता है.

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