फुटबॉल या बास्केटबॉल की जर्सीज़ अब बैगगी जींस और मिनी स्कर्ट के साथ पहनी जा रही हैं. कभी सिर्फ मैच के दिन पहनी जाने वाली जर्सीज़ अब स्टाइल का मुख्य आधार बन गई हैं, जिसे लोग लेयरिंग और अपने निजी अंदाज़ के साथ पहनते हैं
आजकल हम हर जगह फुटबॉल जर्सीज़ देख रहे हैं. ये सिर्फ स्टेडियम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोग इन्हें रोज़मर्रा के कपड़ों के साथ बेहद स्टाइलिश अंदाज़ में पहन रहे हैं. विंटेज जर्सीज़ की मांग अचानक बढ़ गई है, कई बार सिर्फ इसलिए क्योंकि किसी पसंदीदा सेलिब्रिटी ने इन्हें पहने देखा गया है. ‘ब्लोककोर’ (blokecore) ट्रेंड ने इसे और भी लोकप्रिय बना दिया है. लोग फुटबॉल या बास्केटबॉल जर्सीज़ को बैगगी जींस और मिनी स्कर्ट के साथ स्टाइल कर रहे हैं. कभी सिर्फ मैच के दौरान पहनी जाने वाली ये जर्सीज़ अब फैशन का प्रमुख हिस्सा बन चुकी हैं, जिन्हें लेयरिंग और अपने व्यक्तिगत अंदाज़ से एक नया लुक दिया जाता है.
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जब मैं जर्सीज़ पहने सेलिब्रिटीज के बारे में सोचती हूँ, तो दुआ लिपा और रिहाना जैसे नाम तुरंत याद आते हैं. इसके अलावा, स्नूप डॉग को उनके कॉन्सर्ट के दौरान वह प्रतिष्ठित लंबी आस्तीन वाली मैनचेस्टर यूनाइटेड जर्सी पहने याद किया जाता है. लेकिन आखिर ये जर्सीज़ फैशन का इतना अहम हिस्सा कैसे बन गईं? यह चलन नया नहीं है, लेकिन इसने फिर से फैशन जगत में कैसे वापसी की?
हिप-हॉप ने की थी शुरुआत

Above टुपैक शकूर, जो अपनी स्टाइल के लिए जाने जाते थे (फोटो: बैरी किंग/वायरइमेज)
हम सभी जानते हैं कि 90 के दशक के रैपर्स ने बैगगी जींस और ओवरसाइज़्ड टी-शर्ट्स को कैसे लोकप्रिय बनाया था. यह सिर्फ एक ट्रेंड नहीं था, बल्कि यह स्ट्रीटवियर संस्कृति का हिस्सा बन गया. आज हम जो कपड़े पहनते हैं, उसमें भी इसका प्रभाव साफ झलकता है. 90 के दशक की शुरुआत तक, हिप-हॉप के सुनहरे दौर में, जर्सीज़ ने रोज़मर्रा के फैशन में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी थी.
ओवरसाइज़्ड और रिलैक्स्ड फिट वाली NBA, NFL और फुटबॉल जर्सीज़ सिर्फ खेल की पोशाक नहीं रहीं. टुपैक शकूर, द नोटोरियस बी.आई.जी. और जे-ज़ी जैसे कलाकारों ने इन्हें अपनी पहचान के रूप में अपनाया, जिससे स्पोर्ट्सवेयर एक ऐसी चीज़ बन गई जो खेल से कहीं अधिक स्टाइल और आत्म-अभिव्यक्ति को दर्शाती थी. जर्सीज़ अब सिर्फ किसी टीम को सपोर्ट करने का ज़रिया नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा बन गईं.
जब फुटबॉल पॉप कल्चर का हिस्सा बना

Above जर्सीज़ को नया रूप देती एशलीन कास्त्रो (फोटो: गेटी इमेजेज़)
2000 के दशक की शुरुआत तक, फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं रह गया था. सेलिब्रिटी फुटबॉलर्स और WAG (खिलाड़ियों की पत्नियाँ और प्रेमिकाएँ) के दौर ने खेल को मैदान के बाहर भी चर्चा में ला दिया था. यही वह समय था जब जर्सीज़ स्टेडियम के बाहर भी एयरपोर्ट लुक्स और कैज़ुअल पलों में दिखाई देने लगीं.
अब जर्सीज़ को पहनने का अंदाज़ बदल चुका है. लड़कियाँ इन्हें क्रॉप टॉप की तरह या ओवरसाइज़्ड तरीके से स्टाइल कर रही हैं. WAGs ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई, जो अक्सर जर्सीज़ के साथ अपने नाम या लकी नंबर का इस्तेमाल करती थीं. हालाँकि यह उस समय पूरी तरह से ‘फैशन’ नहीं था, लेकिन यहीं से जर्सीज़ का व्यक्तिगत पहचान से जुड़ने का सफर शुरू हुआ.
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जब फैशन जगत ने लिया नोटिस

Above ऑफ-व्हाइट मेश ब्लू वर्ल्ड पेंट सॉकर जर्सी (फोटो: Ssense.com)
सच कहें तो, फुटबॉल जर्सीज़ हमेशा से ही बेहतरीन दिखती हैं. ऐडिडास, नाइकी और अम्ब्रो जैसे ब्रांड्स ने खेल के इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित जर्सीज़ दी हैं. कुछ लोग अब टीम के लिए नहीं, बल्कि डिज़ाइन के लिए जर्सीज़ तलाशते हैं.
फिर फैशन जगत ने कदम रखा. स्ट्रीटवियर के बढ़ते प्रभाव के साथ, डिज़ाइनर्स ने जर्सीज़ को स्पोर्ट्स से आगे देखना शुरू किया. वर्जिल एब्लो ने स्पोर्ट्स और लग्जरी के बीच की रेखा को धुंधला करने वाले पहले डिज़ाइनर्स में से एक थे. जल्द ही बालेंसीएगा और मार्टिन रोज़ जैसे ब्रांड्स ने भी जर्सीज़ के सौंदर्य को अपने संग्रह में शामिल किया.
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इंस्टाग्राम और टिकटॉक ने भी जर्सीज़ को आज के दौर के फैशन में पूरी तरह स्थापित कर दिया है. ये अब हर फीड और स्ट्रीट स्टाइल का हिस्सा हैं.







