Cover लंदन के वाटरलू प्लेस में स्थित बैंक्सी की यह नई कलाकृति ऐतिहासिक कांस्य मूर्तियों के साथ एक गहरा विरोधाभास प्रस्तुत करती है. (चित्र: Getty Images)

रहस्यमयी स्ट्रीट आर्टिस्ट बैंक्सी ने पुष्टि की है कि लंदन के वाटरलू प्लेस में स्थापित नई मूर्ति “झंडे से ढका सूट वाला आदमी” उन्हीं की रचना है. अंध राष्ट्रवाद पर उनके इस तीखे व्यंग्य ने वैश्विक कला जगत में भारी चर्चा छेड़ दी है.

ऐसे समय में जब वैश्विक कला जगत इस रहस्यमयी कलाकार की पहचान के रहस्यों में उलझा हुआ है, बैंक्सी ने अपनी सिग्नेचर ‘गुरिल्ला’ शैली में लंदन के मध्य में एक और धमाका किया है. 29 अप्रैल की सुबह, जब लंदन के वाटरलू प्लेस (Waterloo Place) से कोहरा पूरी तरह छंटा भी नहीं था, वहां अचानक झंडे से ढकी एक ऐसी मूर्ति प्रकट हुई जिसे पहले कभी नहीं देखा गया था. इसके साहसिक और अनूठे स्वरूप ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. 1 मई को, बैंक्सी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक व्यंग्यात्मक वीडियो साझा किया. सैन्य धुन वाले इस वीडियो में मूर्ति को स्थापित करने की प्रक्रिया दिखाई गई थी, जिसके साथ ही उन्होंने आधिकारिक तौर पर इस उत्कृष्ट रचना को अपना स्वीकार किया. यह मूर्ति न केवल बैंक्सी की पारंपरिक 2डी भित्तिचित्र (ग्रैफिटी) शैली से अलग है, बल्कि बकिंघम पैलेस और सैन्य स्मारकों के पास इसकी रणनीतिक स्थापना भी खास है. यह दुनिया को दिखाती है कि कैसे आधुनिक कला सत्ता के साथ एक मौन लेकिन गगनभेदी संवाद कर सकती है. कला अब केवल सजावट नहीं रह गई है; यह व्यवस्था और सामूहिक चेतना के खिलाफ एक खुला विद्रोह बन गई है.

लंदन में मूर्ति का अचानक प्रकट होना

लंदन को चौंकाने वाली बैंक्सी की यह कलाकृति 29 अप्रैल की सुबह सेंट जेम्स (St James's) क्षेत्र के वाटरलू प्लेस में रहस्यमयी ढंग से प्रकट हुई. यह एक बेहद प्रतिष्ठित इलाका है, जो जेंटलमैन क्लबों, राजनयिक कार्यालयों और किंग एडवर्ड सप्तम व फ्लोरेंस नाइटिंगेल जैसी ऐतिहासिक हस्तियों के स्मारकों से घिरा हुआ है. ‘राष्ट्रीय गौरव’ और ‘पारंपरिक व्यवस्था’ का प्रतिनिधित्व करने वाली इन मूर्तियों के बीच, इस अवांछित मेहमान को एक खाली पड़े ट्रैफिक आइलैंड के आधार पर स्थापित किया गया. आस-पास के गैलरी एजेंटों के अनुसार, इस मूर्ति की ऊंचाई और रंग को इतनी बारीकी से डिज़ाइन किया गया है कि दूर से देखने पर यह सदियों पुरानी कांस्य मूर्तियों जैसी ही लगती है. कला और वास्तविकता के बीच की सीमा को जानबूझकर धुंधला करने की यह कलाबाज़ी बैंक्सी की सबसे प्रशंसित विशेषता है. हालांकि अधिकारियों ने तुरंत मूर्ति के चारों ओर सुरक्षा घेरा लगा दिया था, लेकिन आज तक, लंदन के मेयर कार्यालय ने इस विवादास्पद कृति के प्रति उदारता दिखाई है. उन्होंने यहां तक इच्छा जताई है कि इस नई रचना को सुरक्षित रखा जाए, ताकि नागरिक और पर्यटक आधुनिक कला के इस अद्भुत अनुभव का आनंद ले सकें.

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Above यह मूर्ति राजनयिक स्थलों और सत्ता के केंद्र के करीब स्थित है. बैंक्सी का इस स्थान को चुनना उनके स्पष्ट राजनीतिक इरादों को दर्शाता है. (चित्र: Getty Images)

झंडे के नीचे अंधानुकरण

यह मूर्ति एक ऐसे संभ्रांत व्यक्ति का सजीव चित्रण करती है जिसने एक साफ-सुथरा सूट और टाई पहनी हुई है. उसके हाथ में एक विशाल झंडा है, लेकिन हवा में लहराता हुआ वह झंडा पूरी तरह से उसके चेहरे को ढक लेता है. इसके साथ ही, मूर्ति आधार के किनारे की ओर लंबे डग भरती हुई दिखाई देती है, मानो उसे सामने की गहरी खाई का कोई आभास ही न हो. ‘अंधे होकर आगे बढ़ने’ की इस मुद्रा को कला समीक्षक बैंक्सी द्वारा आधुनिक अंध राष्ट्रवाद, लोकलुभावनवाद और राजनीतिक गतिरोध पर एक तीखे व्यंग्य के रूप में देखते हैं. सूट वाला स्वरूप सत्ता के भीतर के वर्ग या बिना सोचे-समझे चलने वाली आम जनता का प्रतीक है, जबकि दृष्टि को बाधित करने वाला झंडा उस थोपी गई राष्ट्रीय विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है. मूर्ति के विवरण को अत्यंत बारीकी से उकेरा गया है. कपड़ों की सिलवटें और शरीर की गतिशीलता उच्च स्तर की कलात्मकता को प्रदर्शित करती है. यह देखने वालों को न केवल चकित करती है, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि क्या आज की इस उथल-पुथल भरी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हम भी इस मूर्ति की तरह अंधे होकर आगे बढ़ रहे हैं?

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Above अपनी पहचान को लेकर चल रही तमाम अफवाहों के बावजूद, बैंक्सी ने अपनी कला के माध्यम से बात करना चुना है और वे अपनी रहस्यमयी व सुरुचिपूर्ण शैली को जारी रखे हुए हैं. (चित्र: Getty Images)

उठता हुआ पर्दा

इस नई मूर्ति का सामने आना एक बेहद संवेदनशील समय पर हुआ है. इसी साल मार्च में, कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों ने खोजी पत्रकारिता के जरिए बैंक्सी की असली पहचान उजागर करने की कोशिश की थी, जिसमें ब्रिस्टल के रॉबिन गनिंगम (Robin Gunningham) का नाम सामने आया था. हालांकि, इस कलाकृति का प्रकट होना पहचान के उस विवाद पर बैंक्सी का सबसे बेहतरीन जवाब है. वह आज भी एक ऐसा स्ट्रीट आर्टिस्ट है जिसे न तो परिभाषित किया जा सकता है और न ही पकड़ा जा सकता है. बैंक्सी के हालिया कदमों पर नज़र डालें, तो 2025 के अंत तक बेघर लोगों की समस्या को उजागर करने वाले लंदन के भित्तिचित्रों से लेकर सितंबर में कानूनी प्रणाली पर तंज़ कसने वाली उनकी नई कृति तक, उनका ध्यान स्पष्ट रूप से अधिक व्यापक और सामाजिक सरोकार वाले राजनीतिक मुद्दों की ओर जा रहा है. उनकी पुरानी मिट जाने वाली स्प्रे पेंट कला की तुलना में, मूर्तिकला जैसा अधिक ‘स्थायी’ माध्यम यह दर्शाता है कि बैंक्सी भौतिक दुनिया में एक गहरा और अमिट ऐतिहासिक प्रभाव छोड़ना चाहते हैं.

 

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