ऐतिहासिक व्यापार मार्गों से प्रेरित होकर, बाचा कॉफी (Bacha Coffee) लाए हैं रमज़ान 2026 के लिए विशेष मेनू और हैम्पर्स, जिनमें है संस्कृति की महक और बेहतरीन अरेबिका का स्वाद
उत्सव के उपहारों (hampers) के चलन से बहुत पहले, समुद्र पार के समाजों में दोस्ती और सम्मान के प्रतीक के रूप में उपहार देने की परंपरा थी. प्राचीन व्यापार मार्गों पर, कॉफी अक्सर एक कीमती भेंट होती थी; जिसे एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक सद्भावना के प्रतीक के रूप में साझा किया जाता था. इसी भावना को बाचा कॉफी ने अपने “मैरीटाइम रूट – अ रमज़ान वोयाज” (Maritime Route – A Ramadan Voyage) के जरिए पुनर्जीवित किया है. यह रमज़ान 2026 का एक ऐसा संग्रह है जो मोरक्को और नुसंतारा (इंडोनेशियाई द्वीपसमूह) के बीच के ऐतिहासिक संबंधों के माध्यम से देने (gifting) के महत्व का जश्न मनाता है.
29 मार्च 2026 तक उपलब्ध यह संग्रह, इफ़्तार के लिए एक विशेष मेनू प्रस्तुत करता है, जिसका आनंद बाचा कॉफी के आउटलेट्स पर 100% अरेबिका कॉफी की 200 से अधिक किस्मों के साथ लिया जा सकता है.
इफ़्तार के इस सफर की शुरुआत ‘चिकन एंड ओट्स चोरबा’ (Chicken & Oat Chorba) से होती है. यह मसालेदार टमाटर शोरबे में तैयार रेशेदार चिकन, मकई और ओट्स का एक बेहतरीन मिश्रण है. इसका टेक्स्चर मखमली है और स्वाद बेहद सुकून देने वाला, जो दिन भर के रोज़े के बाद राहत पहुंचाता है. यह एक ऐसी शुरुआत है जो जानी-पहचानी होते हुए भी स्वाद की गहराइयों से भरी है.
मुख्य भोजन (main course) के लिए, विकल्पों को बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया है. ‘आर्सिक सीबास’ (Arsik Seabass) सुमात्रा के व्यंजनों की एक आधुनिक झलक पेश करता है. इसमें ग्रिल्ड सीबास को खुशबूदार अदरक वाले चावल, भुने हुए टमाटर और कच्चे पपीते के साथ परोसा जाता है. केकोम्ब्रांग (kecombrang), अदरक और लेमनग्रास का स्पर्श अंत में एक ताज़गी भरा स्वाद छोड़ता है.

Above चिकन एंड ओट्स चोरबा इफ़्तार की शुरुआत करता है, जिसमें ओट्स के मखमली टेक्स्चर के साथ मसालेदार टमाटर शोरबे का स्वाद है

Above ऑस्ट्रेलियन वैग्यू स्ट्रिपलोइन को कसावा और शिटाके मशरूम के साथ परोसा गया है, साथ में है हल्दी आलू की प्यूरी और मैंगो सॉस
मेनू का एक और आकर्षण ‘बालीनीज़ स्पाइस्ड चिकन’ (Balinese Spiced Chicken) है. बाली के विशेष मसालों में तैयार चिकन को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक वह नरम न हो जाए. इसके साथ काफिर लाइम की खुशबू वाले चावल, भुनी हुई मूंगफली-नारियल और एक समृद्ध नुसंतारा सॉस परोसी जाती है. टैपिओका क्रैकर्स (साबूदाना पापड़) इसमें कुरकुरापन जोड़ते हैं.
‘ऑस्ट्रेलियन वैग्यू स्ट्रिपलोइन’ (Australian Wagyu Striploin) भी एक शानदार विकल्प है. मैरीनेट किए गए वैग्यू के टुकड़ों को कसावा और शिटाके मशरूम के साथ पेश किया जाता है. साथ में हल्दी वाले आलू की प्यूरी, जो नसि कुनिंग (nasi kuning) की याद दिलाती है, और मीठी आम की चटनी व स्मूर (smoor) का संगम है. यह संयोजन स्वाद को एक नया आयाम देता है, जो गर्मजोशी से भरा और संतुलित है.

Above बालीनीज़ स्पाइस्ड चिकन को काफिर लाइम राइस, भुनी हुई मूंगफली और समृद्ध नुसंतारा सॉस के साथ बाचा कॉफी के अनुभव में शामिल किया गया है

Above यह डेज़र्ट कुरकुरापन, कोमलता और स्वाद का एक पूरा पैकेज है, जिसे बाचा की क्लासिक कॉफी के साथ परोसा जाता है
मिठास के लिए दो सीज़नल पेस्ट्री उपलब्ध हैं. ‘चॉकलेट एंड पिस्ता कुनाफा’ (Chocolate & Pistachio Kunafa) में कुरकुरी कताइफी (kataifi) परतों के साथ चॉकलेट मूस और पिस्ता प्रालिन का संगम है; जो अलग-अलग टेक्स्चर का एक सुरीला मेल है. वहीं, ‘कोकोनट एंड गुला मेलाका क्रोइसैन’ (Coconut & Gula Melaka Croissant) क्लासिक पेस्ट्री का एक उष्णकटिबंधीय (tropical) अवतार है, जिसमें पाम शुगर की गहरी मिठास और नारियल की भीनी खुशबू है.
रमज़ान सेट मेनू की शुरुआत एक कॉफी और एक मुख्य डिश के लिए 268 हज़ार रुपिया से होती है. पूरा पैकेज, जिसमें कॉफी, स्टार्टर, मेन कोर्स, और डेज़र्ट शामिल हैं, 438 हज़ार रुपिया में उपलब्ध है. यह मेहमानों को अपनी पसंद के अनुसार इफ़्तार का अनुभव चुनने की आज़ादी देता है.
इफ़्तार मेनू के अलावा, ‘मैरीटाइम रूट’ संग्रह में दो विशेष रूप से चुने गए (curated) गिफ्ट विकल्प भी हैं: ‘इल्यूमिनेशन हैंपर’ (Illumination Hamper) और ‘रिफ्लेक्शंस हैंपर’ (Reflections Hamper). इन दोनों में ही 100% अरेबिका कॉफी के साथ ‘बाचा हेरिटेज कलेक्शन’ की एक्सेसरीज और आर्टिसनल स्नैक्स का मेल है.
आखिरकार, रमज़ान का असली मतलब नीयत और एकजुटता ही है. ‘मैरीटाइम रूट – अ रमज़ान वोयाज’ के माध्यम से, बाचा कॉफी इस पवित्र महीने में साथ मिलकर बैठने, होशपूर्वक कॉफी की चुस्की लेने और उपहार देने की उस परंपरा को मनाने का अवसर देता है जो सदियों से महासागरों के पार लोगों को जोड़ती आ रही है.




