टिफ़नी (Tiffany) और मुसी डेस आर्ट्स डेकोरेटिफ़्स ने जीन श्लुम्बर्गर के अभिलेखागार से 10,000 कागज़ों को संरक्षित करना शुरू किया है, जो इस मेसन के सबसे प्रख्यात और रचनात्मक सहयोगियों में से एक थे
इस साल पेरिस फैशन वीक में “टिफ़नी एंड कंपनी” (Tiffany & Co) की प्रस्तुति का नाम ‘आई एम ओनली अ पेंसिल’ रखा गया था. यह शीर्षक सुनने में विनम्र लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में उस कार्यप्रणाली को सटीक रूप से दर्शाता है, जिसके माध्यम से ब्रांड के सबसे साहसी और सफल डिज़ाइनर जीन श्लुम्बर्गर काम करते थे. श्लुम्बर्गर, जो 1956 में इस न्यूयॉर्क स्थित आभूषण ब्रांड से जुड़े, ने कभी औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था. उनके डिज़ाइन कार्यशाला में पहुँचने से बहुत पहले ही कागज़ पर आकार ले लेते थे, जहाँ सेटर्स और सुनारों को अक्सर ऐसी तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना पड़ता था, जिन्हें एक प्रशिक्षित जौहरी पहले ही टालना सीख चुका होता है.
श्लुम्बर्गर सबसे पहले एक कलाकार थे, इसलिए उनके द्वारा उपयोग किए गए कागज़ उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन गए हैं. “टिफ़नी आर्काइव्स” के नेतृत्व में एक बहु-वर्षीय पहल के माध्यम से, “टिफ़नी एंड कंपनी” और मुसी डेस आर्ट्स डेकोरेटिफ़्स श्लुम्बर्गर के लगभग 5,000 मूल चित्रों और समान संख्या में अभिलेखीय दस्तावेज़ों को संरक्षित और डिजिटल रूप से इमेजिंग कर रहे हैं. इस परियोजना की शुरुआत वर्जीनिया म्यूज़ियम ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स के सहयोग से की गई थी.
आभूषणों को अक्सर स्थायी माना जाता है, लेकिन यह सच नहीं है. पत्थरों को बदला जाता है, माउंट्स को फिर से बनाया जाता है और सोने को पिघलाकर दोबारा ढाला जाता है. इसलिए आज हमारे पास जो आभूषण है, वह मूल डिज़ाइन के समान हो, यह ज़रूरी नहीं है. डिज़ाइन चित्र ही अक्सर उस मूल इरादे का एकमात्र जीवित प्रमाण होते हैं, जो डिज़ाइनर के अनुपात, उसकी कल्पना और उन रेखाओं को सहेजते हैं जिन्हें उसने आज़माया और फिर छोड़ दिया. जब कोई आभूषण खो जाता है, तो वह वस्तु नष्ट हो जाती है; लेकिन जब उसके पीछे का चित्र खो जाता है, तो वह तर्क भी लुप्त हो जाता है जो यह बताता है कि आभूषण का स्वरूप ऐसा क्यों है.

Above जीन श्लुम्बर्गर द्वारा जैस्मीन नेकलेस का स्केच (तस्वीर: टिफ़नी एंड कंपनी के सौजन्य से)

Above जैस्मीन नेकलेस (तस्वीर: वर्जीनिया म्यूज़ियम ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स, एस्टेट ऑफ़ मिसेज पॉल मेलन / टिफ़नी एंड कंपनी के सौजन्य से)
“टिफ़नी एंड कंपनी” की मुख्य जेमोलॉजिस्ट विक्टोरिया रेनॉल्ड्स, श्लुम्बर्गर के औपचारिक प्रशिक्षण के अभाव को इस कहानी का केंद्र मानती हैं. वे कहती हैं, “चूंकि श्लुम्बर्गर ने जौहरी के रूप में प्रशिक्षण नहीं लिया था, इसलिए उन्हें तकनीकी सीमाओं की चिंता किए बिना डिज़ाइन करने की स्वतंत्रता थी, जिसने उनकी कल्पना को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया.” उदाहरण के लिए, ‘पैलियोने इनैमल’ तकनीक को लें. यह तकनीक, जो सोने की बारीक पन्नी पर पारभासी इनेमल की परत चढ़ाती है, 19वीं सदी की वस्तुओं में अधिक देखी जाती थी. श्लुम्बर्गर ने इसे अपने इनेमल चूड़ियों के लिए पुनर्जीवित किया, जो जैकलीन कैनेडी के साथ इतनी जुड़ गईं कि आज भी इन्हें “जैकी ब्रेसलेट” कहा जाता है. उस दौर के किसी भी प्रशिक्षित जौहरी ने शायद इस तकनीक को पुराना मानकर छोड़ दिया होता, लेकिन श्लुम्बर्गर को किसी भी पुराने ढर्रे ने नहीं रोका.
इसके बाद कार्यशाला के लिए उनकी कल्पनाओं और व्यावहारिक वास्तविकता के बीच सामंजस्य बिठाना ज़रूरी हो गया. वे आगे कहती हैं, “उनके डिज़ाइन को असाधारण तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती थी, जिसमें जटिल वायरवर्क, सोने और प्लैटिनम का अनूठा संयोजन और रत्नों की पेचीदा सेटिंग शामिल थी. उन्होंने अपनी रचनाओं को जीवंत करने के लिए सर्वश्रेष्ठ जौहरियों और कारीगरों के साथ साझेदारी की.”

Above टिफ़नी एंड कंपनी की मुख्य जेमोलॉजिस्ट विक्टोरिया रेनॉल्ड्स (तस्वीर: टिफ़नी एंड कंपनी के सौजन्य से)
मुलहाउस में एक कपड़ा व्यापारी परिवार में जन्मे, श्लुम्बर्गर ने 1930 के दशक के पेरिस में अतियथार्थवादी (Surrealist) डिज़ाइनर एल्सा शियापरेली के लिए बटन और कॉस्ट्यूम पीस बनाए थे. इस वर्ष की प्रस्तुति के बाद के हिस्से में उसी विरासत की झलक मिलती है, जहाँ एक गैलरी उनके अतियथार्थवादी वस्तुओं को समर्पित है और दूसरी उनके आभूषणों पर फैशन के प्रभाव को दर्शाती है. उनके समुद्री जीव, पक्षी और पौधे कभी भी वानस्पतिक चित्रण के रूप में नहीं बनाए गए थे; ये प्रकृति के वे रूप हैं जिन्हें एक ऐसे व्यक्ति ने फिर से बनाया, जिसने अपने शुरुआती साल उन लोगों के बीच बिताए थे जिनका काम उनके अचेतन मन को दर्शाता था.
रेनॉल्ड्स बताती हैं कि रत्नों के प्रति श्लुम्बर्गर का दृष्टिकोण उनकी कलात्मक पृष्ठभूमि को दर्शाता है. वे कहती हैं, “उन्होंने अपने रत्नों को उनकी सुंदरता के लिए चुना. वे उनके अकेले मूल्य से चिंतित नहीं थे, बल्कि इस बात से कि वे उनकी रंग संवेदनशीलता को कैसे निखारते हैं और उनकी रचनाओं को कैसे बढ़ाते हैं. उन्होंने रत्नों का उपयोग ठीक वैसे ही किया जैसे एक चित्रकार रंगों का उपयोग करता है.”
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Above बर्ड ऑन ए रॉक (तस्वीर: वर्जीनिया म्यूज़ियम ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स, एस्टेट ऑफ़ मिसेज पॉल मेलन / टिफ़नी एंड कंपनी के सौजन्य से)

Above जीन श्लुम्बर्गर द्वारा बर्ड ऑन ए रॉक का स्केच (तस्वीर: टिफ़नी एंड कंपनी के सौजन्य से)
उदाहरण के तौर पर, ‘हेज एंड रोज़’ हार को लें, जिसमें पीले नीलम के साथ हीरे और फ़िरोज़ा पत्थर जड़े गए हैं. एक जेमोलॉजिस्ट तुरंत समझ जाएगा कि नीलम प्राकृतिक (अन-एन्हांस्ड) हैं, जबकि उस समय गर्मी के उपचार (हीट ट्रीटमेंट) की प्रक्रिया आम थी. वहीं दूसरी ओर, फ़िरोज़ा, जो कि एक अपारदर्शी और मामूली रत्न माना जाता है, को श्लुम्बर्गर ने बड़े ही सलीके से नीलम और हीरों के बराबर महत्व दिया. उस समय के अधिकांश उच्च आभूषणों में मूल्य का एक सख्त पदानुक्रम होता था, जिसमें सबसे बड़ा और महंगा पत्थर केंद्र में होता था, लेकिन इस हार में रंग और रचना ही सबसे महत्वपूर्ण है, और पत्थर उसके अनुरूप काम करते हैं.
पेरिस में प्रदर्शित आभूषणों में वे टुकड़े भी शामिल हैं जो कभी रेचल लैम्बर्ट “बनी” मेलन के पास थे, जो एक बागवानी विशेषज्ञ और परोपकारी थीं, और श्लुम्बर्गर की करीबी दोस्त व उनकी सबसे बड़ी संग्रहकर्ता थीं. रेनॉल्ड्स कहती हैं, “बनी मेलन एक ग्राहक से कहीं बढ़कर थीं, वे उनकी संरक्षक और प्रेरणा थीं. उनका संग्रह हमें उनकी साझा संवेदनशीलता और असाधारण पसंद की झलक दिखाता है.” मेलन के टुकड़ों में से एक ‘बर्ड ऑन ए रॉक’ ब्रोच का शुरुआती संस्करण है, जिसमें पक्षी लैपिस लाजुली के एक टुकड़े पर बैठा है. पत्थर का चुनाव महत्वपूर्ण है; डिज़ाइन के बाद के संस्करणों में बड़े और कीमती केंद्रीय पत्थरों का उपयोग हुआ, लेकिन मूल विचार में पक्षी को उसके रंग के लिए चुने गए एक खनिज पर बैठाया गया था.
‘बर्ड ऑन ए रॉक’, जो 1965 में टिफ़नी (Tiffany) की सूची में शामिल हुआ, इस प्रस्तुति का अंतिम अध्याय है और यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अभिलेखागार को केवल कांच के पीछे रखने के लिए नहीं बल्कि उपयोग करने के लिए बनाया गया है. टिफ़नी ने इस डिज़ाइन को फिर से जीवंत करना जारी रखा है, हाल ही में नताली वर्डेइल के नेतृत्व में, जो हाउस की मुख्य कलात्मक अधिकारी हैं. रेनॉल्ड्स इस संक्षिप्त विवरण को “अपनी मूल भावना के प्रति सच्चे रहते हुए एक नया दृष्टिकोण लाना” कहती हैं, जहाँ रंगीन पत्थरों को नए संस्करणों के लिए चुना जाता है. यह वह बिंदु है जहाँ संरक्षण केवल विरासत को बचाने से बढ़कर हो जाता है; जब 10,000 कागज़ों को स्थिर और इमेजिंग कर लिया जाएगा, तो आज का डिज़ाइन स्टूडियो श्लुम्बर्गर की शुरुआती सोच का अध्ययन कर सकेगा, न कि केवल उन तैयार आभूषणों का जिन्हें पिछले 60 वर्षों से दोबारा जारी किया गया है.
रेनॉल्ड्स को उम्मीद है कि स्टूडियो में शामिल होने वाले युवा डिज़ाइनर “[श्लुम्बर्गर] की रचनात्मक प्रक्रिया की एक दुर्लभ झलक” देखेंगे, और स्केच व आभूषण को एक साथ देखने से उन्हें पता चलेगा कि डिज़ाइनर ने खुद को कितनी स्वतंत्रता दी थी और उसके साथ न्याय करने के लिए कितनी कौशल की आवश्यकता थी. श्लुम्बर्गर द्वारा टिफ़नी के लिए पहली बार पेंसिल उठाने के लगभग 70 साल बाद, ब्रांड ने पहचाना है कि उनकी विरासत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ये चित्र ही हैं, जिन्हें बचाना सबसे ज़रूरी है.










