Cover नताली लोई अनबाउंड मलेशिया की सह-संस्थापक और प्रमुख तकनीकी अधिकारी हैं

नताली लोई के लिए, तकनीक केवल कोड की पंक्तियां या कोई डिजिटल नवीनता नहीं है; यह भौगोलिक और परिस्थितियों की बाधाओं को दूर करने का एक सशक्त माध्यम है

शिक्षा और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) के प्रति नताली लोई का दृष्टिकोण एक गहरे दर्शन पर आधारित है. वह बताती हैं, “मैं सीखने की ललक और इस विश्वास से प्रेरित हूं कि अवसर भूगोल या परिस्थिति पर निर्भर नहीं होने चाहिए.”

अनबाउंड मलेशिया में, नताली इन धारणाओं को ठोस डिजिटल बुनियादी ढांचे में बदलती हैं. प्रौद्योगिकी प्रमुख के रूप में, वह एक पुरस्कार विजेता ऑगमेंटेड रियलिटी शिक्षा प्लेटफॉर्म के विकास का नेतृत्व कर रही हैं (यह विचार मूल रूप से पोकेमोन गो की लोकप्रियता से प्रेरित था). उनके काम में ऐसे इमर्सिव AR टूल डिज़ाइन करना शामिल है, जो वित्तीय साक्षरता, स्थिरता और आवश्यक डिजिटल कौशल को बढ़ावा देते हैं. यह आसियान क्षेत्र के 300,000 से अधिक छात्रों के लिए जटिल अवधारणाओं को इंटरैक्टिव अनुभवों में बदल देता है. मुफ़्त और समावेशी शिक्षण मॉड्यूल को प्राथमिकता देकर, नताली यह सुनिश्चित करती हैं कि उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक संसाधन वंचित और ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों तक पहुंचें, जो अन्यथा पीछे छूट सकती हैं.

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टेक जगत में नताली का सफर उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों से भरा रहा है. जब उन्होंने महज़ 19 साल की उम्र में अपनी कंपनी अनबाउंड मलेशिया की स्थापना की, तो वह अक्सर अपने आसपास सबसे कम उम्र की व्यक्ति होती थीं—लेकिन उन्होंने इसे एक रणनीतिक लाभ में बदल दिया. नताली कहती हैं, “मेरे पास कोई पुराना नेटवर्क या दशकों का अनुभव नहीं था. मेरे पास सिर्फ दृढ़ विश्वास और कुछ नया सीखने की इच्छा थी.” वह आगे बताती हैं, “मैंने जो पहले से मौजूद था उसकी नकल करने के बजाय, बुनियादी सिद्धांतों के आधार पर नवाचार करना सीखा.”

डिजिटल बुनियादी ढांचे और शिक्षा की वास्तविक समस्याओं को हल करने पर ध्यान केंद्रित करके, नताली ने कारगर नवाचारों के ज़रिए विश्वास हासिल किया. उनका मानना है कि उनकी सफलता लोगों की समस्याओं को गहराई से सुनने और स्केलेबल व मानव-केंद्रित सिस्टम बनाने से पहले स्थानीय वास्तविकताओं को समझने से मिली है.

समावेशी शिक्षा के प्रति नताली की प्रतिबद्धता बेहद व्यक्तिगत है, जो उनकी मां के संघर्ष से प्रेरित है. एक विधवा माता-पिता के रूप में पुरुष-प्रधान उद्योग में अपनी मां को आगे बढ़ते हुए देखकर नताली ने सीखा कि लचीलापन (resilience) विरासत में नहीं मिलता, बल्कि कदम-दर-कदम खुद बनाना पड़ता है.

नताली कहती हैं, “एक शिक्षक और शिक्षा के लिए तकनीक बनाने वाले व्यक्ति के रूप में, मैंने देखा है कि जब लड़कियों को हाशिए पर रखने के बजाय बातचीत में शामिल किया जाता है, तो क्या शानदार परिणाम मिलते हैं.” वह महिलाओं के सशक्तिकरण को राष्ट्रीय सफलता की एक बुनियादी आवश्यकता मानती हैं. उनका तर्क है कि कोई भी देश विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता यदि उसकी आधी क्षमता अदृश्य बाधाओं से घिरी हो. उनका मानना है कि जब महिलाओं को नेतृत्व के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो वे केवल योगदान नहीं देतीं—बल्कि उत्कृष्टता हासिल करती हैं. नताली के अनुसार, “और जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो उसका प्रभाव पीढ़ियों तक दिखाई देता है.”

नताली का अंतिम लक्ष्य संरचनात्मक बदलाव लाना है. वह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करती हैं जहां उभरती अर्थव्यवस्थाएं “डिजिटल हिचकिचाहट से आत्मविश्वासी नवाचार” की ओर बढ़ें. मानव-केंद्रित एआई और डिजिटल इनोवेशन के ज़रिए, उनका लक्ष्य ऐसे सिस्टम डिज़ाइन करना है जो देशों को केवल अनुयायी बनने के बजाय “अपने भविष्य के निर्माता” के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएं.

वह कहती हैं, “संरचनात्मक बदलाव को आकार लेते देखना सबसे बड़ा इनाम है.” उनके अनुसार, “उभरते देशों को स्पष्टता और महत्वाकांक्षा के साथ प्रौद्योगिकी, शिक्षा और वैश्विक भागीदारी को अपनाते हुए देखना बेहद ऊर्जावान है.”

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