आखिर पोलो को ‘राजाओं का खेल’ क्यों कहा जाता है? और कैसे पोलो संस्कृति ने फैशन ट्रेंड्स और लक्ज़री घड़ियों के डिज़ाइन को प्रभावित किया?
पोलो (Polo) शायद दुनिया के सबसे पुराने खेलों में से एक है. कहा जाता है कि पोलो की उत्पत्ति 2000 साल से भी पहले प्राचीन फारस (Persia) में हुई थी. उस समय, इसका उपयोग कुलीन घुड़सवारों और सैनिकों के प्रशिक्षण के लिए किया जाता था ताकि उनकी घुड़सवारी और युद्ध कौशल को निखारा जा सके. बाद में, युद्ध और व्यापार के माध्यम से यह खेल भारत और चीन जैसे देशों तक पहुंचा. 19वीं शताब्दी में, भारत में तैनात ब्रिटिश अधिकारियों ने इस खेल को अपनाया और इसे इंग्लैंड ले गए. वहां इसके आधुनिक नियम बनाए गए और धीरे-धीरे यह खेल उच्च वर्ग, शिष्टाचार और सम्मान का प्रतीक बन गया.
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आखिर पोलो ‘राजाओं का खेल’ क्यों बना?
जब भी पोलो की बात होती है, तो लोग अक्सर इसे उच्च वर्ग या ‘हाई सोसाइटी’ से जोड़कर देखते हैं. इसे ‘राजाओं का खेल’ (The Sport of Kings) भी कहा जाता है. दरअसल, इस धारणा के पीछे ठोस कारण हैं. पोलो मुख्य रूप से एक ऐसा खेल है जिसमें प्रवेश पाना आसान नहीं है और यह अपनी विशिष्टता और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है.

Above पोलो एक अत्यंत विशिष्ट खेल है जिसमें शामिल होने के लिए उच्च स्तर की तैयारी और संसाधनों की आवश्यकता होती है. (Genna Martin, seattlepi.com) (Photo by GENNA MARTIN/San Francisco Chronicle via Getty Images)
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें, तो पोलो के हर मैच में खिलाड़ी घोड़ों की ऊर्जा बनाए रखने के लिए हर ‘चक्का’ (Chukka - खेल का एक चरण) के बाद अपना घोड़ा बदलते हैं. मैच को पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में घोड़े रखने के लिए कई कर्मचारियों, प्रशिक्षकों, पशु चिकित्सकों और उच्च स्तरीय अस्तबल जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, एक मानक पोलो मैदान का आकार लगभग 9 फुटबॉल मैदानों के बराबर होता है. केवल शीर्ष स्तर के निजी एस्टेट या क्लब ही खेल के लिए इतनी बड़ी ज़मीन उपलब्ध करा सकते हैं. इन भारी खर्चों के कारण ही पोलो एक बेहद उच्च श्रेणी का खेल बन गया है.

Above दिवंगत प्रिंस फिलिप अपने जीवनकाल में पोलो खेल के प्रति बेहद उत्साहित थे और अक्सर मैदान पर नज़र आते थे. (Photo by Dave M. Benett/Getty Images)
अत्यधिक खर्चीला होने के अलावा, पोलो को दुनिया भर के कुलीन वर्ग, विशेष रूप से ब्रिटिश शाही परिवार का बहुत प्यार मिला है. उदाहरण के लिए, दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पति, प्रिंस फिलिप पोलो के प्रति बेहद जुनूनी थे. शाही परिवार के साथ इस खेल के गहरे जुड़ाव ने समय के साथ पोलो को एक कुलीन और विलासितापूर्ण छवि प्रदान की है, जिससे यह समाज में प्रतिष्ठा और शक्ति का प्रतीक बन गया है.
पोलो खिलाड़ियों को केवल दाएं हाथ का उपयोग करने की अनुमति क्यों है?

Above सुरक्षा कारणों से, पोलो मैचों में कड़े नियम हैं कि खिलाड़ी केवल अपने दाएं हाथ से ही मैलेट पकड़कर शॉट लगा सकते हैं. (Photo by Samir Hussein/WireImage)
पोलो की एक अनूठी विशेषता यह है कि हर खिलाड़ी, चाहे वह बाएं हाथ का हो या दाएं हाथ का, उसे केवल दाएं हाथ से ही मैलेट (Mallet) पकड़ने की अनुमति होती है. यह दुनिया के उन चुनिंदा खेलों में से एक है जहां ऐसा प्रतिबंध लागू है. यह नियम पूरी तरह से सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यदि बाएं हाथ का खिलाड़ी और दाएं हाथ का खिलाड़ी एक साथ गेंद की ओर बढ़ते हैं, तो उनके मैलेट एक ही तरफ होंगे, जिससे घोड़ों की सीधी टक्कर या मैलेट के आपस में उलझने का खतरा बढ़ सकता है. खेल के सुचारू संचालन और खिलाड़ियों व घोड़ों की सुरक्षा के लिए यह नियम सख्ती से लागू किया जाता है.
मैदान पर ‘ट्रेडिंग इन’ (Treading In) की अनोखी परंपरा

Above पोलो मैच के हाफटाइम के दौरान, दर्शकों को मैदान पर आकर घोड़ों के खुरों से बने गड्ढों को भरने के लिए आमंत्रित किया जाता है, जो अब एक सामाजिक रस्म बन गया है. (Genna Martin, seattlepi.com) (Photo by GENNA MARTIN/San Francisco Chronicle via Getty Images)
पोलो एक अत्यंत तीव्र गति वाला खेल है. जब घोड़े तेज़ी से दौड़ते हैं और अचानक मुड़ते हैं, तो उनकी नाल से घास उखड़ जाती है और मैदान में गड्ढे (Divots) बन जाते हैं. अगर इन्हें ठीक न किया जाए, तो अगले चरण में घोड़े लड़खड़ा कर गिर सकते हैं और गेंद भी ठीक से रोल नहीं करेगी. इसलिए, हाफटाइम के दौरान दर्शकों को मैदान पर आमंत्रित किया जाता है ताकि वे अपने पैरों से घास को दबाकर गड्ढों को भर सकें. सुरक्षा के लिए शुरू की गई यह गतिविधि अब एक प्रतीकात्मक सामाजिक रस्म बन गई है, जो दर्शकों के बीच सहभागिता बढ़ाती है. कई बार इसमें “घास में छिपी शैम्पेन खोजने” जैसे मज़ेदार खेल भी शामिल होते हैं.
पोलो ने फैशन की दुनिया को कैसे प्रभावित किया?

Above पोलो मैचों के दौरान दर्शक अक्सर बेहद सुरुचिपूर्ण और औपचारिक परिधानों में नज़र आते हैं, जो इस खेल की गरिमा को दर्शाता है. (Photo by Neilson Barnard/Getty Images for Veuve Clicquot)
पोलो शिष्टाचार और ऐश्वर्य का पर्याय है. मैच देखने आने वाले दर्शक बेहद शालीन और सुरुचिपूर्ण कपड़ों में आते हैं. महिलाओं की चौड़ी किनारी वाली टोपियां और पुरुषों के बेहतरीन सिलाई वाले सूट पारंपरिक शिष्टाचार और इत्मीनान भरी जीवनशैली का प्रतीक हैं. यही कारण है कि पोलो फैशन जगत के लिए प्रेरणा का एक शाश्वत स्रोत बन गया है. इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण Ralph Lauren का “Polo” ब्रांड है, जिसने पोलो की कुलीन छवि को सफलतापूर्वक व्यावसायिक रूप दिया. उनकी क्लासिक शॉर्ट-स्लीव कॉलर वाली पोलो शर्ट आज दुनिया भर में उच्च-स्तरीय जीवनशैली की चाह रखने वालों के लिए एक अनिवार्य परिधान बन गई है.

Above प्रसिद्ध Ralph Lauren का “Polo” ब्रांड इसी खेल से प्रेरित होकर बनाया गया था और आज फैशन का पर्याय बन चुका है. (Photo: Getty Images)
पोलो का प्रभाव अब घड़ियों की दुनिया में

Above Jaeger-LeCoultre की रिवर्सो घड़ी का डायल पलटा जा सकता है, जिससे पोलो मैच के दौरान कांच को टूटने से बचाया जा सके. (Photo: Jaeger-LeCoultre)
Jaeger-LeCoultre
फैशन के अलावा, पोलो संस्कृति ने घड़ी उद्योग पर भी गहरा प्रभाव डाला है, जिससे कई अद्भुत कृतियों का जन्म हुआ. इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण Jaeger-LeCoultre का Reverso (रिवर्सो) संग्रह है. 1931 में जन्मी Reverso घड़ी को 90 साल से अधिक हो चुके हैं. इसे मूल रूप से पोलो खिलाड़ियों के लिए डिज़ाइन किया गया था, क्योंकि खेल के दौरान घड़ियों के टूटने का खतरा रहता था. डायल को सुरक्षित रखने के लिए, ब्रांड ने एक ऐसा केस डिज़ाइन किया जिसे पलटा जा सकता है, ताकि मैच के दौरान कांच सुरक्षित रहे और केवल धातु का पिछला हिस्सा बाहर रहे.

Above रिवर्सो घड़ियों के दोनों तरफ अक्सर अलग-अलग डिज़ाइन होते हैं, जो इसे बेहद खास बनाते हैं. (Photo: Jaeger-LeCoultre)

Above रिवर्सो घड़ियों के दोनों तरफ अक्सर अलग-अलग डिज़ाइन होते हैं, जो इसे बेहद खास बनाते हैं. (Photo: Jaeger-LeCoultre)
रिवर्सो ने उस समय की प्रचलित आर्ट डेको (Art Deco) शैली, सरल ज्यामितीय रेखाओं और अपनी विशेष संरचना के साथ बाज़ार में धूम मचा दी और जल्द ही यह Jaeger-LeCoultre की सबसे प्रतिष्ठित घड़ी बन गई. बाद में, ब्रांड ने इस ‘फ्लिप’ डिज़ाइन का उपयोग करते हुए कई नए मॉडल पेश किए. कभी दोनों तरफ अलग-अलग डायल दिए गए, तो कभी खाली पिछले हिस्से पर इनेमल पेंटिंग की गई. हाल के वर्षों में, Jaeger-LeCoultre ने विशेष कस्टमाइज़ेशन सेवा भी शुरू की है, जिससे घड़ी प्रेमी अपने लिए एक अनूठी याद के रूप में पिछले हिस्से पर नाम या चित्र उकेरवा सकते हैं.

Above Piaget Polo 79 संग्रह मूल रूप से पोलो खेल से प्रेरित था और अब इसे आधुनिक रूप में फिर से पेश किया गया है. (Photo: Piaget)
Piaget
1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक की शुरुआत में, स्पोर्ट्स घड़ियों का चलन बढ़ने लगा था और उच्च समाज में इसकी मांग तेज़ हो गई थी. Piaget के तत्कालीन प्रमुख और परिवार की चौथी पीढ़ी के वारिस, Yves Piaget ने पोलो खेल से प्रेरणा ली और 1979 में अपनी टीम के साथ मिलकर पहला Polo संग्रह पेश किया. कीमती धातुओं से बनी, गोल और प्रवाहमय रेखाओं वाली यह घड़ी खेल की भावना और लालित्य का अद्भुत संगम थी, जो अपने समय की एक क्लासिक पहचान बन गई.

Above 1970 और 80 के दशक में जन्मा Piaget Polo संग्रह आज भी अपनी क्लासिक अपील के लिए जाना जाता है. (Photo: Piaget)
2024 में, Piaget ने इस प्रतिष्ठित पोलो घड़ी को पुनर्जीवित करते हुए ‘Polo 79’ संग्रह लॉन्च किया. इसमें वही प्रवाहमय रेखाएं और उभरी हुई धारियां बरकरार रखी गई हैं. चमकदार और साटन-ब्रश फिनिश का संगम एक अद्वितीय दृश्य अनुभव पैदा करता है. पूरी तरह से सोने से बनी यह घड़ी लॉन्च होते ही घड़ी प्रेमियों और आलोचकों की प्रशंसा का पात्र बन गई. 2025 में, Piaget ने Polo 79 के नए मॉडल पेश किए हैं, जो व्हाइट गोल्ड और येलो गोल्ड के मिश्रण के साथ और भी आकर्षक लगते हैं.

Above प्रसिद्ध पोलो खिलाड़ी Pablo Mac Donough, जिन्होंने इस खेल में नई ऊंचाइयां छुई हैं. (Photo by Riccardo Savi/Getty Images For Richard Mille)
Richard Mille
2018 में, Richard Mille ने भी पोलो खिलाड़ी Pablo Mac Donough से प्रेरित होकर RM 53-01 टूरबिलोन घड़ी का निर्माण किया. इसमें विशेष लैमिनेटेड नीलमणि क्रिस्टल का उपयोग किया गया है, जो कांच टूटने और कलाई को चोट लगने से बचाता है. इसका केस TPT® कार्बन फाइबर से बना है, जो झटके और टकराव को सहने में बेहद सक्षम है. यह घड़ी खेल के दौरान लगने वाले ज़बरदस्त झटकों को आसानी से झेल सकती है.
इसके अलावा, इसके मूवमेंट में एक विशेष सस्पेंशन आर्किटेक्चर का उपयोग किया गया है. मूवमेंट को दो ब्रेडेड स्टील के तारों से लटकाया गया है, जो तनाव को समान रूप से वितरित करते हैं. ये तार 5,000g से अधिक के झटके को सहन कर सकते हैं, जिससे घड़ी के नाजुक तंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचता. यह यांत्रिकी और सामग्री विज्ञान में आधुनिक घड़ी निर्माण की उत्कृष्टता का एक शानदार उदाहरण है.

Above Richard Mille RM 53-01 टूरबिलोन घड़ी, जो अपनी मजबूती और तकनीकी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है. (Photo: Richard Mille)
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