Meryl Streep and Anne Hathaway reunite in the long-awaited ‘Devil Wears Prada 2’ (Photo: IMDB)
Cover बहुप्रतीक्षित फिल्म “डेविल वियर्स प्राडा 2” में मेरिल स्ट्रीप और ऐनी हैथवे एक बार फिर साथ नज़र आएंगी (फोटो: IMDB)
Meryl Streep and Anne Hathaway reunite in the long-awaited ‘Devil Wears Prada 2’ (Photo: IMDB)

फैशन मैगज़ीन से लेकर न्यूज़रूम के ड्रामा तक, ये फिल्में और शोज़ एडिटर्स, लेखकों और स्टाइल की तेज़-तर्रार दुनिया की झलक दिखाते हैं. इसमें “डेविल वियर्स प्राडा 2” की वापसी भी शामिल है.

फैशन क्लॉज़ेट. असंभव सी डेडलाइन्स. और वह एडिटर जो अपनी एक नज़र से पूरे कमरे को शांत कर दे. हॉलीवुड हमेशा से ही मैगज़ीन की दुनिया का दीवाना रहा है—और इसके पुख्ता कारण भी हैं. “अगली बेट्टी” के तीखे व्यंग्य से लेकर “द बोल्ड टाइप” की शानदार ऊर्जा तक, इस विधा ने पॉप कल्चर में कुछ बेहद आइकॉनिक वर्कप्लेस कहानियां दी हैं. 1 मई को सिनेमाघरों में “डेविल वियर्स प्राडा 2” रिलीज़ हो रही है. इसमें मेरिल स्ट्रीप, ऐनी हैथवे, एमिली ब्लंट और सिमोन एशले मुख्य भूमिकाओं में हैं. ऐसे में इन शानदार कहानियों को देखने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता.

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“डेविल वियर्स प्राडा 2” (2026): डिजिटल युग की सच्चाई

Above “डेविल वियर्स प्राडा 2” में मेरिल स्ट्रीप एक बार फिर मिरांडा प्रीस्टली के प्रभावशाली अवतार में लौट रही हैं

यह बहुप्रतीक्षित सीक्वल पब्लिशिंग की सबसे कड़वी सच्चाई का सामना करता है: प्रिंट मीडिया कमज़ोर हो रहा है. मेरिल स्ट्रीप (मिरांडा प्रीस्टली) “रनवे” को ज़िंदा रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं. उनका अपनी पूर्व असिस्टेंट एमिली ब्लंट (एमिली चार्लटन) के साथ सत्ता का तनावपूर्ण संघर्ष चल रहा है. एमिली अब एक लक्ज़री समूह की उच्च-अधिकारी हैं, जो विज्ञापन के उस बजट को नियंत्रित करती हैं जिसकी “रनवे” को सख़्त ज़रूरत है. यह भूमिका का उलटाव बेहद दिलचस्प है—असिस्टेंट अब आर्थिक नियंत्रण रखती है. ऐनी हैथवे (एंडी सैक्स) भी एक अज्ञात भूमिका में लौट रही हैं. वहीं, सिमोन एशले मिरांडा की नई फर्स्ट असिस्टेंट अमरी बारी के रूप में शामिल हुई हैं. जहां पहली फिल्म सफलता की एक कहानी थी, वहीं “डेविल वियर्स प्राडा 2” एक ऐसा कॉर्पोरेट थ्रिलर है, जिसमें बहुत कुछ दांव पर लगा है.

“द बोल्ड टाइप” (2017–2021): यथार्थवादी मेंटरशिप, अवास्तविक डेडलाइन्स

Above “द बोल्ड टाइप” में न्यूयॉर्क की एक ग्लैमरस मैगज़ीन में करियर बनाती तीन दोस्तों की कहानी है

“कॉस्मोपॉलिटन” की पूर्व एडिटर-इन-चीफ जोआना कोल्स के वास्तविक अनुभवों से प्रेरित, यह फ्रीफॉर्म सीरीज़ इस शैली में बेहद दुर्लभ है. इसकी एडिटर जैकलीन कार्लाइल (मेलोरा हार्डिन) एक तानाशाह के बजाय एक बेहतरीन मेंटर हैं—जो क्वीन-बी की पुरानी छवि को शानदार तरीके से तोड़ती है. कुछ कहानियां सीधे कोल्स के करियर से ली गई हैं. उदाहरण के लिए, एक प्रोडक्ट टेस्ट की कहानी जो बेहद विनाशकारी साबित होती है (योनि एग वाला एपिसोड देखें). लेकिन इसमें एक पेंच है. मीडिया पेशेवरों ने इस शो की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की कि एक असिस्टेंट बिना एक भी लेख लिखे चार साल तक काम कर सकती है. डिजिटल मीडिया में काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को यह बात बेहद हास्यास्पद लगेगी.

“अगली बेट्टी” (2006–2010): अतिरंजित कहानियां, वास्तविक महत्वाकांक्षा

Above “अगली बेट्टी” में अमेरिका फरेरा की बेट्टी सुआरेज़ ने साबित किया कि सुंदरता से अधिक महत्वाकांक्षा मायने रखती है

एबीसी (ABC) की “अगली बेट्टी” ने फैशन की दुनिया का इस्तेमाल कर वर्ग, आव्रजन और पहचान को इतनी बेबाकी से खोजा, जिसकी बराबरी बहुत कम वर्कप्लेस कॉमेडी शोज़ कर पाए हैं. क्वींस की रहने वाली एक शानदार मैक्सिकन-अमेरिकन असिस्टेंट बेट्टी सुआरेज़ (अमेरिका फरेरा), “मोड” मैगज़ीन की अति-सुंदर दुनिया में अपना रास्ता बनाती हैं. वहीं, वह लगातार साज़िश रचने वाली क्रिएटिव डायरेक्टर विल्हेल्मिना स्लेटर (वैनेसा विलियम्स) का सामना भी करती हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेट्टी का कभी कोई पारंपरिक मेकओवर नहीं होता—उनका स्टाइल उनकी अपनी शर्तों पर विकसित होता है. असली एडिटर्स ने उनकी पत्रकारिता की तैयारी और सीखने की इच्छा की काफ़ी सराहना की है. यह शुरुआती करियर की असली लगन का बेहद सटीक चित्रण है.

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“13 गोइंग ऑन 30” (2004): नैतिक मूल्यों पर आधारित एक बेहतरीन रॉम-कॉम

Above इस फिल्म में जेनिफर गार्नर ने एक फैशन एडिटर की भूमिका निभाई है, जो दोहरी ज़िंदगी जी रही है

1980 के दशक के शानदार संगीत और चुलबुली बॉडी-स्वैप कहानी के पीछे, यह 2004 की रॉम-कॉम मीडिया नैतिकता की तीखी आलोचना प्रस्तुत करती है. “पॉयज़” मैगज़ीन की 30 वर्षीय फैशन एडिटर जेनिफर गार्नर (जेना रिंक) को पता चलता है कि वह विचारों की चोरी कर रही हैं. साथ ही, वह प्रतिद्वंद्वी पब्लिकेशन “स्पार्कल” के साथ संपादकीय रहस्य साझा कर रही हैं. यह धोखा आंशिक रूप से उनके सह-संपादक द्वारा ही रचा गया था. इसमें सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि उसने यह सब अपने साथ ही किया है. यह एक ऐसा कड़वा सच है, जो शीर्ष पर पहुंचने के लिए किए जाने वाले नैतिक समझौतों की चेतावनी देता है. इसे व्हिटनी ह्यूस्टन के बेहतरीन डांस सीक्वेंस के साथ बड़े ही आकर्षक तरीके से पेश किया गया है.

“यंगर” (2015–2021): पब्लिशिंग की दुनिया में उम्र को लेकर वास्तविक चिंताएं

Above “यंगर” न्यूयॉर्क में बुक पब्लिशिंग की दुनिया में उम्र के आधार पर होने वाले भेदभाव को दर्शाता है

डैरेन स्टार का यह शो “यंगर” ग्लैमरस मैगज़ीन से बुक पब्लिशिंग की दुनिया की ओर ले जाता है. लेकिन यहां भी वैसी ही चिंताएं मौजूद हैं, शायद और भी ज़्यादा. जब 40 वर्षीय तलाकशुदा लिज़ा मिलर (सटन फोस्टर) एम्पिरिकल प्रेस में एंट्री-लेवल की नौकरी पाने के लिए अपनी उम्र के बारे में झूठ बोलती हैं, तो यह शो एक अलग मोड़ ले लेता है. यह इंडस्ट्री में युवाओं के निरंतर वस्तुकरण पर एक तीखा और असहज करने वाला आरोप बन जाता है. यह शो इस बात पर ज़ोर देता है कि युवा और प्रासंगिक दिखने का दबाव केवल दिखावे का मुद्दा नहीं है—यह अस्तित्व बचाए रखने की लड़ाई है. स्पष्ट रूप से मांग करने वाली डायना ट्राउट (मिरियम शोर) क्वीन-बी की भूमिका में पूरी तरह फिट बैठती हैं.

“मिंक्स” (2022–2023): नारीवाद, पूंजीवाद और 1970 के दशक की पब्लिशिंग दुनिया

Above “मिंक्स” में कट्टर आदर्शवाद और लाभ-संचालित वास्तविकताओं के बीच टकराव देखने को मिलता है

1970 के दशक के लॉस एंजिल्स पर आधारित इस शानदार कॉमेडी को वह पहचान नहीं मिली जिसकी यह हक़दार थी. इसमें आदर्शवादी नारीवादी जॉयस प्रिगर (ओफेलिया लोविबॉन्ड) की कहानी है, जो डग रेनेटी (जेक जॉनसन) के साथ मिलकर महिलाओं के लिए पहली इरोटिक मैगज़ीन बनाती हैं. हर कॉरडरॉय जम्पर और पैटर्न वाले ब्लाउज़ को बड़ी सावधानी से रीक्रिएट किया गया है. यह शो एक ऐतिहासिक रूप से ज़मीनी नज़रिया पेश करता है. यह दिखाता है कि जब कट्टर आदर्शवाद कम-बजट वाली पब्लिशिंग की लाभ-संचालित वास्तविकताओं से मिलता है, तो क्या होता है. जॉयस के नारीवादी घोषणापत्र और डग की टैब्लॉइड प्रवृत्ति के बीच का तनाव ही इस शो की असली जान है.

“जस्ट शूट मी!” (1997–2003): 90 के दशक की फैशन मैगज़ीन का असली पक्ष

Above “जस्ट शूट मी!” 90 के दशक की फैशन मैगज़ीन की अराजक और व्यक्तित्व-संचालित दुनिया को दर्शाता है

“डेविल वियर्स प्राडा 2” से बहुत पहले, एनबीसी (NBC) का “जस्ट शूट मी!” फैशन मैगज़ीन की दुनिया की विसंगतियों को अपनी तीखी बुद्धि के साथ पेश कर रहा था. यह सीरीज़ माया गैलो (लौरा सैन जियाकोमो) पर केंद्रित है. वह एक सिद्धांतवादी पत्रकार हैं, जो गंभीर न्यूज़ जॉब से निकाले जाने के बाद अनिच्छा से अपने पिता जैक (जॉर्ज सीगल) की “ब्लश” मैगज़ीन से जुड़ती हैं. माया की संपादकीय महत्वाकांक्षाओं और हाई-फैशन की सतही मांगों के बीच का तनाव बेहद स्पष्ट लगता है. इसके अलावा, पूर्व-मॉडल्स और फ्लर्ट करने वाले फ़ोटोग्राफ़रों की यह कहानी 90 के दशक की मीडिया संस्कृति का एक शानदार चित्रण है.

“सडनली सुज़ान” (1996–2000): एक ब्रांड के रूप में कॉलमनिस्ट

Above “सडनली सुज़ान” एक नवनिर्वाचित सिंगल मैगज़ीन कॉलमनिस्ट की सैन फ्रांसिस्को में ज़िंदगी पर केंद्रित है

इस एनबीसी (NBC) सिटकॉम में ब्रुक शील्ड्स (सुज़ान कीन) ने एक ऐसी मैगज़ीन राइटर का किरदार निभाया है, जो अपने मंगेतर को शादी की वेदी पर छोड़ देती है. यह 1990 के दशक के उस ट्रेंड को पूरी तरह से दर्शाता है, जिसमें एक पूरे पब्लिकेशन की पहचान एक लाइफस्टाइल कॉलमनिस्ट के इर्द-गिर्द बुनी जाती थी. सैन फ्रांसिस्को के “द गेट” पर आधारित यह शो मुख्य रूप से ऑफिस रोमांस पर केंद्रित है. विशेष रूप से सुज़ान का अपने एडिटर और बॉस के साथ जटिल समीकरण, जो उनके पूर्व मंगेतर का भाई है. हालांकि इसमें इंडस्ट्री का यथार्थ थोड़ा कम है, लेकिन इसने एक महत्वपूर्ण बात समझ ली थी: मैगज़ीन में व्यक्तित्व हमेशा से ही मुख्य उत्पाद रहा है.

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